नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया क्या है ? पेपर के दौरान अंको को कैसे नॉर्मलाइज किया जा सकता है

नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया क्या है?

What is Normalization in SSC Exams & How it is going to affect Your Marks?

हाल ही में एसएससी ने विभिन्न पाली में परीक्षा आयोजित की है. जिनमे से कुछ उनमे से SSC सेलेक्शन पोस्ट चरण- VI 2019 परीक्षा, SSC स्टेनोग्राफर ग्रेड C और D 2019 परीक्षा हैं, और जल्द ही SSC GD कांस्टेबल 2019 परीक्षा आयोजित की जाएगी.

एसएससी ने चयन निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर क्वालीफाइंग अंको की गणना के लिए नॉर्मलाइजेशनविधि की घोषणा की है.

देश भर में होने वाली विभिन्न तरह की परीक्षा गैट , कैट , मैट और रेलवे भर्ती बोर्ड में नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया को लागू किया जा चुका है ताकि सभी उम्मीदवारो को प्रतियोगिता में उचित मौका प्राप्त हो सके.

नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया की ज़रूरत क्यों पड़ी ?

कई बार ऐसा होता है की एक ही दिन उम्मीदवारो का पेपर होता हो लकिन पेपर को अलग अलग पाली में आयोजित किया जाता है.

इसी के चलते उम्मीदवारो ने विरोध किया. जो उनकी पाली में पेपर दिया जाता है वे काफी कठिन होता है. और जो दूसरी पाली में दिया जाता है वेकाफी सरल होता है. बस इसी शिकायत को आधार बनाकर नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को लागू किया गया.

आखिर क्या होता है नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया में ?

नॉर्मलाइजेशन सिस्टम के ज़रिये ये अनुमान लगाया जाता है की पेपर कितना सरल है. और इसके अनुसार ही अंक निर्धारित किये जाते है.

मान लीजिये की परीक्षा में पेपर काफी कठिन था और अगर आप इसमें 70 अंक भी ले आते है तो उसे 100 अंक के बराबर मानाजायेगा.

क्या अंको में नॉर्मलाइजेशन का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है ?

अगर वास्तविकता में देखा जाए तो नॉर्मलाइजेशन से उन उम्मीदवारो पर प्रभाव पड़ेगा जिनके ज़्यादा स्कोर होते थे. हालांकि ऐसेउम्मीदवारो को अपने अंको के चिंता नहीं करनी चाहिए क्योकि उन्होंने अपना परीक्षा पास कर लिया होगा. बस उन्हें अगले चरण कीप्रक्रिया का पालन करना होगा.

इसी तरह जो उम्मीदवार सोचते है की उन्होंने कम स्कोर किया होगा लेकिन नंबर आने पर वे खुद दंग रह जाते है. उन्हें ये समझनाचाहिए की नॉर्मलाइजेशन के कारण उनका परिणाम अच्छा आया है और चुनाव प्रक्रिया के लिए अगले चरण का परिणाम पहलेवास्तविक परिणाम से काफी भिन्न होगा.

नॉर्मलाइजेशन के प्रमुख प्रभाव क्या है ?

जो उम्मीदवार ये सोचता है की उन्होंने ने अपनी पाली में न्यूनतम अंक प्राप्त किये है वे भी उच्च अंक प्राप्त कर सकते है.

जो उम्मीदवार सोचते है की उच्च अंक प्राप्त कर सकते है वे वास्तव में कम सामान्यकृत अंक प्राप्त करेंगे.

उम्मीदवारों का चयन भारत के सभी शासी बोर्डो के लिए बहुत तेज़ और आसान प्रक्रिया होगी.

कठिन और आसान स्तर के साथ परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को अब एक सामान मंच पर देखा जायेगा.

अलग अलग पारियो के आधार पर अब कोई भिन्नता नहीं होगी.

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2 thoughts on “नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया क्या है ? पेपर के दौरान अंको को कैसे नॉर्मलाइज किया जा सकता है

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